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नमः शिवाय च - शिवतराय च ॥

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मूल मंत्र :  ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च॥ "                                        श्री रुद्रम् ( नमकम्) अंश, कृष्ण यजुर्वेद (16.4) जो समस्त कल्याण और आनंद का मूल कारण है , उस शिव को नमन। जो न केवल कल्याण का स्रोत है , बल्कि सक्रिय रूप से कल्याण और आनंद का सृजन करता है , उसे प्रणाम। जो स्वयं मंगलमय है और उससे भी बढ़कर सर्वोच्च कल्याण का स्वरूप है , उस परम शिव को नमस्कार। Abstract This paper develops a unified philosophical framework beginning from the Vedic invocation of Śrī Rudram— “Namaḥ Śivāya ca Śivatarāya ca” —and extending across Eastern and Western traditions of metaphysics, epistemology, and logic. It argues that reality is best understood as a continuous resolution of potentiality into experience , a process in which consciousness is not merely an obser...

क्या भारत अपने ‘आध्यात्मिक निर्यात’ को एक सुसंगत वैश्विक दर्शन में बदल पाएगा ?

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  21 वीं सदी की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मानवता के पास अभूतपूर्व तकनीकी शक्ति है , परंतु उतनी ही गहरी अस्तित्वगत अस्थिरता भी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता , जैव - प्रौद्योगिकी और वैश्विक पूँजी के विस्तार ने मनुष्य को सक्षम तो बनाया है , किंतु “ क्यों ” और “ किस दिशा में ”— इन प्रश्नों को और अधिक जटिल कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत का “ आध्यात्मिक निर्यात ”— योग , ध्यान , चेतना - विज्ञान और समन्वयी दर्शन — विश्व मंच पर एक वैकल्पिक संभावना के रूप में उभरता है। लेकिन मूल प्रश्न वही है : क्या यह निर्यात एक संगठित , सुसंगत वैश्विक दर्शन में परिवर्तित हो सकता है — या यह केवल आध्यात्मिक युक्तियों और तकनीकों का बिखरा हुआ संग्रह बनकर रह जाएगा ? 1. आध्यात्मिक निर्यात : अनुभव का प्रसार , दर्शन का विखंडन पिछले सौ वर्षों में भारत से विश्वस्तर पर प्रसारित आध्यात्मिक तत्वों ने वैश्विक जीवनशैली को गहराई से प्रभावित किया है। अनेक योग स्टूडियो , ध्यान - एप्स , माइंडफुलनेस - प्रोग...